सोमवार, मई 24, 2010

मेरी हिता....


मेरी सहेली गीता ने ये कविता बड़े प्यार से लिखी है...



कूदती फांदती,

नाक बहती

दांत खुजाती

कब गोद में आओगी...........

गुन गुने हाथों से

मेरे दूध को बोलो कब तुम सह्लओगी.......

पैर कब लगेंगे,

कब हाथ होंगे बड़े,

और तब तुम आकर

मेरे आँचल में छिप जाना

हम तुम मिलकर

तब लुका छिपी खेलेंगे.....

14 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

कब हाथ होंगे बड़े,
और तब तुम आकर
मेरे आँचल में छिप जाना
हम तुम मिलकर
तब लुका छिपी खेलेंगे.....

इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय भास्कर ने कहा…

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

Ritu ने कहा…

SO SWEET........ nak bahati

geeta ने कहा…

aey....meri anumati leni zaruri nahi thiiiii....geetu..

Ashutosh ने कहा…

hita will be a lucky child

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति!!

माधव ने कहा…

nice

IILM GSM Library & Information Centre ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
vinay kainthola ने कहा…

It touches my heart. Really, good one.

Keep it up.

abhi ने कहा…

मस्त लिखा आपने :)
बहुत अच्छा :)

Renu ने कहा…

I was not aware of this, you are a good poet. Keep it up...

shilpi ranjan prashant ने कहा…

ये रचना साबित करती है कि ममता का एहसास नौ महीने गर्व से पल कर नहीं निकलता... दिल को छू गई ये पंक्तियां।