शुक्रवार, जुलाई 16, 2010

मैं खुश हूँ...



खुशनुमा एहसास
खुशनुमा प्यार
अजनबी सा बिलकुल नहीं
मेरा अपना संजोया संव्राया

भले ही छूट गए तुम
सशरीर
लेकिन आत्मा मेरी
तुम्हारे साथ रही

वही तुम्हारे अन्दर
तुम्हारे मन में बसी बसाई
अब जब तुम हो सशरीर भी
तो मेरे कण कण में तुम
मेरी उँगलियों में
मेरे होठों पर
मेरे गालों पर
दौड़ती तुम्हारी भाषा
तुम्हारी छूवन
तुम्हारे बोल
तुम्हारा स्पर्श...

9 टिप्‍पणियां:

shilpi ने कहा…

बहुत प्यारा एहसास है...स्पर्श जिंदगी जीने की ताकत दे जाता है.... पाने के संघर्ष को जिलाए रखता है।

Rohit ने कहा…

I like picture more than poem :) hahaha...kidding its nice

ANU CHAUHAN ने कहा…

BHUT AACHI KAVITA LIKHI HAI. AISA LAGA PADH KAR JO TUM MAHSUSH KAR RAHI HO VO HI SHABDO ME GUNTH DIYA HAI..ND PIC TO SUPERB LAGAI HAI...

विनीत उत्पल ने कहा…

शायद आप अपनी अंतर्भावना को शब्दों में सही तरह नहीं पिरो सकी. क्योंकि उन अंतर्भावनों को शब्दों में पिरोना संभव भी नहीं है. बेहतरीन फोटो और बेहतरीन भावनाओं का मिश्रण.

Priyanka ने कहा…

तुम जो भी लिखती हो, अच्छा लिखती हो।

neeraj ने कहा…

its really nice one.appreciate ur though sa.ek ehsaas pyaara

गौतम राजरिशी ने कहा…

भिगोते-से अहसास...कोमल शब्दों में सिमटी एक भावपूर्ण कविता मैम और साथ की तस्वीर भी उतनी छू लेने वाली।

शुक्रिया लिंक भेजने के लिये। आप कैसी हैं?

neha ने कहा…

really very touching..... its superb pic and poem both. ek aurat ki bhavnao ki sachhi awaaz jise aaj ke yug ke swarthi log shayad hi samajh pate hai, samjhane walo ki sankhya bahut kaam hai aur ladki ke jazbatoon se khelne wale logo ki sankhya bahaut jyada hai aaj bhi toh thanks to all jo aise samjah paye aur na sirf samjhe balik issey mehsus kar paye ki wakya mai sitri uss pyaar uss izzat ki hakdar hai jo shayad abhi tak ussey purna roop mai nahi mil paya hai....

Ajay Gautam ने कहा…

very touching....