
तुम्हें चिढ़ाना
चांद को आजमाना
बस कल की ही बात तो है
यूं ही रूठना और बिगड़ जाना
हंसी को थाम लेना
उंगलियों को फोड़ लेना
और हां,
नाखूनों को नेलकटर से काटना
आज ही तो है
कभी हंसी की लहर
तो कभी गुदगुदी का मंजर
होंठ पर तिरछी मुस्कान
दरवाजे का धीमे से किरियाते हुए
बोलना चींचींचीं
एकदम वही सब कुछ
जैसा तुम्हारे साथ है
जैसा मेरे साथ है
बस और कोई एवज नहीं
कोई और राह नहीं
बस में चलते जाना
पसीने की गंध
धकियाते हुए उतर जाना
नुक्कड़ पर ऑटो में
उस चेहरे को थाम लेना
कभी आजमाना तो कभी इतराना
सब कुछ आज का ही तो है
कभी डर से आम खा लेना
कभी तकरार में छिप जाना
सब आज ही तो है
4 टिप्पणियां:
bahut lyrical lagaa. darvaaje ke khulne ki awaaj achhi lagi.
छोटी छोटी बातों पर गौर किया है ...
आज एक उपहार है!
वाह ... बहुत ही बढिया।
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