गुरुवार, मार्च 15, 2012

अनमोल यादें




एक आँगन मेरा बस
और आ जाती हैं
ना जाने कितनी अनमोल यादें
चिहुंक उठता है मेरा मन
कभी अबोला तो
कभी सांसो का मद्धम शोर
यूँ ही कहीं भी
कभी भी

7 टिप्‍पणियां:

वाणी गीत ने कहा…

अनमोल यादों का खजाना आँगन भरपूर !
सुन्दर भाव !

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 17/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Madhuresh ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति,
शुभकामनायें!

उपासना सियाग ने कहा…

यादें सच में अनमोल ही होती है ..........

Saras ने कहा…

यादों को तो सिर्फ बहाना चाहिए..जब चाहो, जहाँ चाहो चली आएँगी ....

Anand Dwivedi ने कहा…

कभी अबोला तो कभी साँसों का मद्धिम शोर !
...
इसे जितना ही शांत होकर सुनेंगी ...उतना ही तेज गूंजेगा !!

avanti singh ने कहा…

bahut hi sundar panktiyaan ,meri rachna अबोला वादा par aap saadr aamntrit hai