तुम नहीं थे
मंद बहती बयार में
तेज चलते अंधड़ में
न तो उस आइसक्रीम में
जो तुमने मुझे दी थी खाने
एक बार नहीं कई-कई बार
तुम वहाँ भी नहीं थे
जिसे मैंने सबसे अपना माना
जहां मैं कई-कई बार जाती हूँ
देखती हूँ उस रास्ते पर
जहां तुम मुझे रिदा छोड़ गए थे
उन गलियों में जहां तुमने
पिलाई थी मुझे
अपने वे मीठे बोल
वह हंसी
जो देर तक अब तक
गूंजती रहती है मेरे कानों में
तुम नहीं हो
वहाँ जो मेरा शरीर है
जहां तुम्हारी अनुभूति है
जहां तुमने कभी स्पर्श किया था
तुम्हारी वो हलकी छुवन
मेरे गालों पर अब भी बसी
तुम क्यों नहीं हो वहाँ
जहां मेरी साँसे होकर भी नहीं हैं
मेरे आंसू हैं जहां
मेरे थरथराते होंठ
कापते हाथ पर
जहां अब भी तुम्हारा स्पर्श है
